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महालक्ष्मी मंदिर, मुंबई में कराएं दिवाली लक्ष्मी पूजा : 27-अक्टूबर-2019
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3 अक्टूबर 2019

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दिल्ली-एनसीआर

बुधवार, 16 अक्टूबर 2019

बस्ते के बोझ तले दबता बचपन, अमर उजाला की पड़ताल, बच्चे कक्षा के मुकाबले कंधों पर ढो रहे अधिक बोझ

शिक्षा निदेशालय ने सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व निजी स्कूलों को बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 

अमर उजाला ने मंगलवार को स्कूलों के बाहर जाकर बच्चों के बस्ते के बोझ का रिएलिटी चेक किया। इसमें पाया गया कि बच्चे अपनी कक्षा के मुकाबले में कंधों पर अधिक बोझ ढो रहे थे। इतने भारी भरकम बस्तों के कारण उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है।

अमर उजाला ने नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के कुछ स्कूलों के बाहर बच्चों के बस्ते को चेक किया। निदेशालय ने पहली से दूसरी कक्षा तक के बच्चों के लिए वजन 1.5 किलो निर्धारित किया है, लेकिन देखा गया कि बस्ते का वजन इतना अधिक था कि इससे उनकी पीठ झुक रही थी। वहीं छोटे बच्चों के इन बस्तों को न उठा पाने के कारण कई अभिभावक उन्हें अपने कंधों पर लिए हुए थे। 

तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों के बस्तों का भार भी तीन किलो से अधिक था। बच्चे बस्ते में सभी पुस्तकें व नोटबुक लेकर आए। कुछ अभिभावकों ने कहा कि पता नहीं चलता कि शिक्षक कौन सी पुस्तक या नोट बुक मांग ले। इस कारण से वह सभी पुस्तकें व नोटबुक बस्ते में रख देते हैं। पानी की बोतल बस्ते के वजन को और बढ़ा रही है।

सोमवार को रिमाइंडर के रूप में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे में कई स्कूलों को इसकी जानकारी नहीं थी। हालांकि उन्हें बीते साल के दिशा-निर्देशों की जानकारी थी। अभिभावक भी इस बस्ते के वजन से अपने बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित दिखाई दिए। कुछ बच्चों के बैग में अतिरिक्त पाठ्यसामग्री भी दिखाई दी, जबकि दिशा-निर्देशों में इसकी मनाही है।
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केजरीवाल सरकार ने टैक्सी ड्राइवरों को लुभाने के लिए चला दांव, ये शुल्क किए माफ

दिल्ली सरकार ने टैक्सी ड्राइवरों को लुभाने के लिए नया दाव चला है। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने मंगलवार को बताया कि दिल्ली सरकार ने तय किया है कि टैक्सी ड्राइवरों पर लगने वाला फिटनेस परीक्षण शुल्क पूरी तरह से हटा दिया जाएगा। इसके अलावा बाकि सभी शुल्कों को तीन गुना घटा दिया गया है। टैक्सी ड्राइवरों से अब जीपीएस और सिम चार्ज भी नहीं लिया जाएगा।

गहलोत ने बताया कि दिल्ली मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित दरें एक नवंबर से लागू होंगी। सरकार की नई दरों के हिसाब से परमिट शुल्क, जो पहले 1500 से 2000 रुपये होता था, वो अब घट कर केवल 500 रुपये रह जाएगा। फिटनेस परीक्षण शुल्क जो पहले 600 से 800 रुपये था, नई दरें लागू होते ही पूरी तरह से खत्म हो गया है। 

दिल्ली सरकार के इस कदम से टैक्सी ड्राइवरों ने राहत की सांस ली है। नई दरों के हिसाब से फिटनेस टेस्ट पेन्लटी को एक हजार रुपये से घटा कर 300 रुपये कर दिया गया है। जिस पर अब विलंब शुल्क 50 रुपये की जगह घटाकर 30 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।
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प्रधानमंत्री की भतीजी के बाद अब मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के साथ दिल्ली में हुई झपटमारी 

दिल्ली में स्नैचिंग की घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है, जिससे दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठनें लगे है। ताजा मामला उत्तरी दिल्ली के कमला नगर इलाके का है। यहां मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट से फोन छीनने का मामला प्रकाश में आया है। 

घटना उस समय की बताई जा रही है, जब मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अपने परिवार के साथ एक रेस्तरां मे रात को खाना खाने गए थे। इसी दौरान उन्हें फोन आया, जैसे ही उन्होंने फोन उठाया, तभी एक बाइक सवार ने उनका फोन छिना और फरार हो गया। 

बता दें कि इसी सप्ताह 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भतीजी दमयंती बेन के साथ दिल्ली में झपटमारी की घटना हुई थी। दो स्कूटी सवारों ने उनका पर्स छिना लिया था। हालांकि बाद में दिल्ली पुलिस ने दोनों झपटमारों को गिरफ्तार कर लिया था। 
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डेढ़ लाख ई-चालान वापस लेगी दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने डेढ़ लाख ई-चालान वापस लेने का फैसला किया है। इनमें से ज्यादातर चालान राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर अगस्त से लेकर 10 अक्तूबर के बीच तेज रफ्तार से वाहन चलाने के लिए काटे गए थे। हालांकि इस बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि वसूली गई जुर्माना राशि का क्या होगा। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रैफिक पुलिस में ज्वाइंट कमिश्नर स्तर के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, "दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अगस्त और 10 अक्तूबर के बीच ढाई महीने के बीच काटे गए डेढ़ लाख चालान वापस ले रही है। इनमें से ज्यादातर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 24 पर गति सीमा के उल्लंघन से संबंधित हैं। 

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने कहा, "ये चालान एनएच 24 में निजामुद्दीन ब्रिज और दिल्ली-यूपी सीमा पर स्थित गाजीपुर के बीच काटे गए थे।" 

यह है पूरा मामला

अब सवाल यह उठता है कि आखिर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को इन चालान को वापस क्यों लेना पड़ा। इस का जवाब देते हुए एक अधिकारी ने कहा, "इन चालान को वापस लेने का कारण यह है कि पीडब्ल्यूडी विभाग ने एक साइनबोर्ड लगाया था जिस पर गति सीमा 70 किमी प्रति घंटा लिखा था। जबकि चालान एनएच पर 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से वाहन चलाने पर काटे गए। बहुत सारी शिकायत मिलने के बाद हमने चालान वापस लेने का फैसला किया।" 

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, ट्रैफिक पुलिस ने पीडब्ल्यूडी से कहा कि वे साइनबोर्ड को बदल कर 60 किमी प्रति घंटा कर दें, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। पुलिस ने बताया कि अब हाईवे पर लगे कैमरों में उच्च गति सीमा को 70 किमी प्रति घंटा कर दिया गया है। 

क्या होगा जुर्माना राशि का

अब सवाल यह है कि ट्रैफिक नियम तोड़ने पर जनता से जुर्माने के तौर पर जो करोड़ों रुपये वसूले गए हैं उनका क्या होगा। दिल्ली पुलिस के पास इसका कोई जवाब नहीं है। 

कोर्ट का डर

पुलिस के आला अधिकारी के मुताबिक, इन चालान को वापस लेने का एक कारण यह भी हो सकता है कि कुछ वाहन चालकों ने कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करने का मन बना लिया था। क्योंकि उन्हें लग रहा था कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है और वे निर्दोष हैं। अधिकारी ने कहा कि कोर्ट में इस मामले पर कोई दलील नहीं दे पाने पर ट्रैफिक पुलिस की अजीब स्थिति हो जाती। 
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दिल्ली ट्रैफिक पुलिस दिल्ली ट्रैफिक पुलिस

दिल्ली: झटपटमारी के आधे से ज्यादा मामले अनसुलझे, पीएम की भतीजी से वारदात के बाद मुद्दा गरमाया

प्रधानमंत्री की भतीजी दमयंती बेन के साथ शनिवार को हुई झपटमारी की घटना के बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से सवाल उठने लगे हैं। झपटमारी का शिकार हुए अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस को घेरना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि पुलिस को अन्य वारदातों को सुलझाने में भी मुस्तैदी दिखानी चाहिए। 

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस साल 30 सितंबर तक झपटमारी के दर्ज मुकदमों में सिर्फ आधे ही सुलझ पाएं हैं। 4,762 मुकदमे दर्ज किए गए थे जिनमें 2,686 सुलझ पाए। 

सोशल मीडिया पर एक पीड़ित आशीष दीक्षित ने सोमवार को दिल्ली पुलिस को से टैग करते हुए कि दो साल पहले उसके साथ लूट की घटना हुई थी। बहुत कोशिशों के बाद एक एफआईआर दर्ज हुई थी, लेकिन उसके बाद आज तक मामले में कुछ नहीं हुआ। दीक्षित ने पीएम की भतीजी के मामले को सुलझाने में दिखाई तत्परता के लिए पुलिस पर तंज भी कसा। 
 

खास लोगों के मामले सुलझा लेती है पुलिस, बाकी निराश


राजधानी में किसी वीवीआईपी या खास के साथ वारदात होती है तो पुलिस बेहद कम समय में उसे सुलझा लेती है। उधर, आम लोगों को पुलिस से ज्यादातर निराशा ही हाथ लगती है। प्रधानमंत्री की भतीजी के मामले को भी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सुलझा लिया। पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल झपटमारी और लूटपाट के औसतन 50 फीसदी मामले ही सुलझ पाते हैं। 

वीवीआईपी लोगों के मामले में केस को हल करने का प्रतिशत 95 फीसदी के आसपास है। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दावा करते हैं कि पुलिस के लिए हर पीड़ित महत्वपूर्ण है। पुलिस किसी के साथ भी कोई भेदभाव नहीं करती।

झपटमारी की वारदातें
 
साल वारदातें
2019 4762
2018 6932
2017 8231
2016 9571
2015 9896
2014 7350

(2019 के आंकड़े 1 जनवरी से 30 सितंबर तक)


देश की राजधानी दिल्ली को सुरक्षा के लिहाज से बहुत अच्छा नहीं माना जाता। महिला सुरक्षा के नाम पर तो राजधानी की स्थिति और ज्यादा खराब है। 

रोजाना होती हैं औसतन 18 झपटमारी व छह लूट की वारदात


सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों पुलिस ने राजधानी में अधिक अपराध वाले दो हजार डार्क स्पॉट की पहचान कर वहां सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए हैं, इसके बाद भी बदमाश, वारदात को अंजाम देने में कामयाब हो रहे हैं। राजधानी में रोजाना औसतन झपटमारी की 18 और लूट की छह वारदात हो रही हैं।

राजधानी के डार्क स्पॉट वह स्थान हैं जहां बदमाश सबसे ज्यादा लोगों को शिकार बनाते हैं। इनमें मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन, पॉश कॉलोनी और व्यस्त बाजार प्रमुख हैं। तड़के और शाम के समय झपटमारी और लूटपाट करने वाले सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं।

पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी गौरव उर्फ नोनू ने भी इस बात का खुलासा किया कि सुबह के समय सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी काफी कम होती है। ऐसे में उन्हें अपराध करने में कोई डर नहीं लगता। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बड़े आराम से फरार हो जाते हैं।

मधु विहार में महिला उषा रानी और ज्योति नगर में राजुल सिंघल की लूटपाट का विरोध करने पर बदमाशों ने गोली मारकर हत्या तक कर दी थी। मामले में अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं।

दुष्कर्म और छेड़छाड़ की स्थिति भी चिंताजनक


झपटमारी : एक जनवरी से 30 सितंबर तक नौ माह में 4762 मामले दर्ज किए गए। इस तरह रोजाना औसतन 18 दर्ज किए जा रहे हैं।

लूटपाट : राजधानी में बीते नौ माह में 1558 लूट की वारदातें दर्ज की गईं। हर दिन औसतन छह वारदात हो रही हैं।

दुष्कर्म : पिछले नौ माह में 1721 मामले सामने आए। रोजाना औसतन छह मामले सामने आ रहे हैं।

छेड़छाड़ के मामले : पिछले नौ माह के दौरान 2276 घटनाएं पुलिस तक पहुंचीं। रोजाना औसतन आठ मामले।

(नोट: सभी आंकड़े एक जनवरी 2019 से 30 सितंबर 2019 के बीच के हैं)

यह हैं अधिक वारदात वाले स्थान

आनंद विहार, विवेक विहार, जगतपुरी, जामा मस्जिद, गोविंदपुरी, जीटीबी एंक्लेव, शाहदरा, यमुना विहार, भजनपुरा, द्वारका मोड़, उत्तम नगर, जनकपुरी वेस्ट, जनकपुरी ईस्ट, कृष्णा नगर, मदर डेयरी, पांडव नगर, तिलक नगर, शादीपुर, चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, आदर्श नगर, डीयू, जहांगीरपुरी, मयूर विहार, न्यू अशोक नगर आदि स्थानों पर झपटमारों का काफी आतंक है।

दिल्ली पुलिस ने किया कड़े इंतजाम का दावा

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि स्ट्रीट क्राइम पर लगाम लगाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। इसके तहत हर जिले में एक-एक प्रखर वैन की शुरुआत की गई है जो पूरे जिले में लगातार पेट्रोलिंग करती है। 24 घंटे वाली पिकेट का भी इंतजाम किया गया है।

पीसीआर के अलावा ट्रैफिक पुलिस के जवानों को भी बदमाशों की धरपकड़ के लिए कहा गया है। हर थाने में रफ्तार बाइकों की तैनाती के अलावा कई जिलों में जगुआर पेट्रोलिंग शुरू की गई है। पुलिस आयुक्त का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने से स्ट्रीट क्राइम में 20 फीसदी तक कमी आई है। 
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दिल्ली-एनसीआर में आज से ग्रैप की पाबंदियां लागू, नहीं चलेंगे डीजल जेनरेटर

दिल्ली-एनसीआर में  मंगलवार से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) यानी ग्रैप लागू हो रहा है। इससे डीजल से चलने वाले जनरेटर व पारंपरिक ईंट भट्ठों पर प्रतिबंध रहेगा। बीते दो वर्षों से यह नियम दिल्ली में लागू हो रहा था, लेकिन एनसीआर के अन्य शहरों पर यह लागू नहीं हो रहा था। हालांकि 'आवश्यक सेवाओं' में छूट जारी रहेगी। 

ग्रैप योजना के तहत दिल्ली समेत गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम, सोनीपत, पानीपत और बहादुरगढ़ में भी डीजल जेनरेटर पर रोक रहेगी। हालांकि इनमें से कई शहरों के अधिकारियों का कहना है कि बैन के आदेश को लागू कराना मुश्किल होगा। 

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) ने ग्रैप के दौरान सिर्फ दिल्ली में डीजल जेरनेरट पर रोक लगाई थी। 

ईपीसीए ने इस साल सख्ती बरतते हुए कहा है कि दिल्ली में प्रदूषण तभी खत्म हो सकता है, जब आसपास के शहरों में भी यह नियम लागू हो। हालांकि, एनसीआर के शहर अब भी पूरी तैयारी न होने की दलील देकर नियम में छूट की मांग कर रहे हैं। 

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) ने सूची बनाई है जिन्हें छूट दी जा रही है। इनमें मेडिकल सुविधाएं,  एक्सक्लेटर, एयरपोर्ट, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, रेलवे स्टेशन, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन में ट्रेन और स्टेशन की सुविधाएं शामिल हैं। 

वहीं ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, शिक्षण संस्थान, मॉल आदि में जेनरेट सेट पर पाबंदी रहेगी। ईपीसीए ने पहले ही साफ कर दिया था कि हाउसिंग सोसायटी में सिर्फ लिफ्ट के इस्तेमाल में छूट रहेगी और पावर बैकअप के लिए नहीं मिलेगी। 


सरकारी एजेंसियां हाई अलर्ट पर

दिल्ली की लगातार खराब होती आबोहवा में सोमवार को थोड़ा सुधार आया है। मौसमी दशाओं में बदलाव होने से वायु गुणवत्ता सूचकांक 270 से घटकर 252 दर्ज किया गया। अगले दो दिनों तक स्थिति कमोबेश ऐसी ही रहेगी। इसके बावजूद पूरी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब स्तर पर रही। वहीं, द्वारका सेक्टर-8 में सूचकांक 300 पार पहुंच गया। 

वहीं, सरकारी एजेसियों के हाई अलर्ट पर रहने से निगरानी प्रणाली भी सख्त रहेगी। ऐसे में हवा और बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि, महीने के आखिरी सप्ताह में दिल्ली के हालात बिगड़ने का अंदेशा है।

सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकॉस्टिंग एंड सिचर्स (सफर) का कहना है कि सोमवार को हवा की दिशा व तरीके में आए बदलाव से दिल्ली में पराली के धुएं का असर तकरीबन नहीं रहा। अगले दो दिनों में इसकी मात्रा करीब एक फीसदी रहेगी। 

फिलहाल दक्षिण पूर्वी हवाएं चल रही हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिम इलाके में चक्रवाती दशाएं बन रही हैं। दोनों के मिले-जुले असर से अगले दो दिनों तक वायु प्रदूषण पिछले दिनों की तुलना में कम रहने की उम्मीद है। 

सोमवार को भी इसमें गिरावट देखी गई। वायु गुणवत्ता सूचकांक रविवार के 270 की तुलना में सोमवार को 252 रहा। हालांकि, अभी भी यह खराब स्तर पर रहा। जबकि पंजाब व हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में पराली जलाने के मामले देखे जा रहे हैं। 

सफर का पूर्वानुमान है कि मौसमी बदलावों का असर दिवाली से पहले तक रहेगा। महीने के चौथे सप्ताह में एक बार फिर से इसमें गिरावट दर्ज की जाएगी। इस दौरान तापमान में भी कमी आएगी। 

दूसरी मौसमी दशाएं भी खराब रहेंगी। उस वक्त अगर ज्यादा पटाखेबाजी हुई या पराली जलाने के मामले में तेजी से बढ़ोत्तरी दर्ज की गई तो हालात बदतर हो सकते हैं। इससे हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर से भी पार जा सकती है। हालांकि, सफर का मानना है कि अगर दिल्ली अपने प्रदूषण को सीमित रख सकी तो हवा दमघोंटू नहीं होगी।

आज से लागू होंगी यह पाबंदियां

दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार से ग्रैप लागू हो रहा है। इसके चलते डीजल के जनरेटर बंद रहेंगे। वहीं, खरपतवार जलाने पर भी सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही पारंपरिक तरीके से चलने वाले ईंट के भट्टे भी बंदे होंगे। निर्माण स्थलों पर इस तरह के इंतजाम करने होंगे, जिससे धूल के कण उड़ने न पाएं। निर्माण सामग्री पर पानी का छिड़काव करने के साथ उसे ढंककर रखना होगा। 

ईपीसीए का कहना है कि दिल्ली व एनसीआर के सभी एजेंसियों को अलर्ट मोड पर डाल दिया गया है। इस दौरान इलाके के हॉट स्पॉट पर औचक निरीक्षण करके प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी है। इस दौरान ज्यादा ध्यान औद्योगिक क्षेत्रों, सार्वजनिक परिवहन के बड़े स्थलों पर रहेगा। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

लगातार खराब हो रही हवा, पहली बार सुधरी

सीपीसीबी के आंकड़े बताते हैं कि लगातार खराब होती आबोहवा बृहस्पतिवार को खराब स्तर पर पहुंच गई थी। 10 अक्तूबर को एक्यूआई 211 था। अगले दिन 216 पर पहुंच गया। 12 अक्तूबर को सूचकांक 222 व 13 को 270 दर्ज किया गया। सोमवार  इसमें एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, द्वारका सेक्टर आठ का सूचकांक 300 से पार था।

टॉप पांच वायु गुणवत्ता वाले इलाके

द्वारका सेक्टर 8: 307
आनंद विहार:   292
विवेक विहार:   283
बवाना:            282
जनकपुरी:        277
अशोक विहार:  259

सफर का पूर्वानुमान

तारीख             पीएम 10     पीएम 2.5
15 अक्तूबर           22          117
16 अक्तूबर           231         122
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दिल्ली-एनसीआर की हवा में दिखा सुधार, वायु गुणवत्ता में ये इलाके हैं सबसे आगे

दिल्ली की लगातार खराब होती आबोहवा में सोमवार को थोड़ा सुधार आया। मौसमी दशाओं में बदलाव होने से वायु गुणवत्ता सूचकांक 270 से घटकर 252 दर्ज किया गया। अगले दो दिनों तक स्थिति कमोबेश ऐसी ही रहेगी। इसके बावजूद पूरी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब स्तर पर रही। वहीं, द्वारका सेक्टर-8 में सूचकांक 300 पार पहुंच गया। उधर, मंगलवार से दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू हो रहा है। इससे डीजल से चलने वाले जनरेटर व पारंपरिक ईंट भट्ठों पर बैन रहेगा। सरकारी एजेसियों के हाई अलर्ट पर रहने से निगरानी प्रणाली भी सख्त रहेगी। ऐसे में हवा और बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि, महीने के आखिरी सप्ताह में दिल्ली के हालात बिगड़ने का अंदेशा है। आगे पढ़िए दिल्ली एनसीआर के शीर्ष पांच वायु गुणवत्ता वाले इलाके:


 
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एनसीआर के प्रदूषित वातावरण को लेकर 17 को पर्यावरण मंत्रालय की होगी बैठक

वायु प्रदूषण
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर पर्यावरण मंत्रालय ने 17 अक्तूबर को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इसमें दिल्ली एनसीआर के हालात के लिए कथित रूप से जिम्मेदार संबधित राज्यों के साथ चर्चा होगी।

बैठक में पराली जलाने, थर्मल पावर से होने वाले प्रदूषण, निर्माण और उद्योगों के चलते वायु प्रदूषण, उसे कम करने के उपायों, राज्यवार कार्ययोजना तथा वर्तमान स्थितियों पर चर्चा होगी। बैठक में कृषि, शहरी विकास, पंचायती राज, ग्रामीण विकास मंत्रालय समेत यूपी, दिल्ली, पंजाब हरियाणा, राजस्थान के पर्यावरण मंत्री और अधिकारी शामिल होंगे।

राज्यों के पर्यावरण सचिवों को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि, सभी राज्य वायु प्रदूषण के ताजा हालातों पर अपनाए जा रहे उपायों और दीर्घकालीन प्रयासों की विस्तृत रिपोर्ट के साथ उपस्थित हों।  

पर्यावरण मंत्रालय को दिल्ली सरकार से शिकायत

मंत्रालय का कहना है कि दिल्ली सरकार पर्यावरण सुधार के कामों के नाम पर शून्य और प्रचार में अव्वल है। इसलिए मंत्रालय ने बैठक बुलाकर राज्यों द्वारा किए जा रहे कामों की समीक्षा कर रहा है। पिछले दिनों पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली सरकार के प्रदूषण सुधार को लेकर दिए जा रहे विज्ञापनों पर तंज कसा था।

एनसीआर में वायु गुणवत्ता बेहद खराब

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। जिसके चलते गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और नोएडा के आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता 300 हो गया है, जो बहुत खराब स्तर है।
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एनसीआर में 60 हजार सस्ते फ्लैटों को ग्राहकों का इंतजार, नहीं मिल रहे खरीदार

देश का रियल एस्टेट क्षेत्र सुस्ती के दौर से गुजर रहा है। इसका असर सस्ते मकानों (फ्लैट) की बिक्री पर भी देखने को मिल रहा है। प्रॉपर्टी ब्रोकरेज कंपनी प्रोपटाइगर ने एक रिपोर्ट में कहा है कि एनसीआर में करीब 60 हजार किफायती मकान बनकर तैयार हैं, लेकिन ग्राहकों के अभाव में वे बिक नहीं पा रहे हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जुलाई के अंत तक नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम (भिवाड़ी, रेवाड़ी, नीमराना और धारुहेड़ा सहित) में बिना बिके मकानों की संख्या 1,08,937 लाख थी। इनमें से 54 फीसदी यानी 58,516 मकानों की कीमत 45 लाख रुपये या इससे कम है। इसके बावजूद इन मकानों को खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। 

हालांकि, कंपनियों को उम्मीद है कि होम लोन पर ब्याज दरों में गिरावट और 45 लाख रुपये तक के मकान खरीदने पर ब्याज में 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त छूट की वजह से आने वाले समय में बिल्डर बड़ी संख्या में सस्ते मकान बेच पाएंगे। 

रियल एस्टेट बाजार बुरी तरह प्रभावित 
एलारा टेक्नोलॉजीज के समूह मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) मणि रंगराजन का कहना है कि दिवालिया प्रकिया में फंसे बिल्डरों की बढ़ती संख्या ने एनसीआर में और खासकर नोएडा में रियल एस्टेट बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। 

इससे खरीदारों का विश्वास कम हुआ है, जिससे बिक्री प्रभावित हुई है। इस कारण बिल्डरों के पास मकानों की बड़ी इंवेन्ट्री जमा हो गई है। एलारा टेक्नोलॉजीज के पास ही हाउसिंग डॉट कॉम, प्रोपटाइगर डॉट कॉम और मकान डॉट कॉम का मालिकाना हक है। 

इंवेन्ट्री खत्म करने में लगेगा समय
रंगराजन ने कहा कि बिक्री की वर्तमान स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि बिल्डरों को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अपने मौजूदा स्टॉक को बेचने में तीन से साढ़े तीन साल लगेंगे, जबकि गुरुग्राम में यह अवधि 28 महीने हो सकती है। 

रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। हालांकि, यह तैयार सस्ते मकानों की खरीदारी के लिए एक अच्छा अवसर भी प्रदान कर रहा है। 

उन्होंने कहा कि जीएसटी दर में एक फीसदी की कमी से पिछले एक साल में लोगों में संपत्तियों में निवेश किया है। साथ ही नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में मकानों की कीमतों में भी कुछ कमी आई है। 
उधर, डीएलएफ ने एक दिन में बेचे 700 करोड़ के फ्लैट
रियल एस्टेट क्षेत्र में सुस्ती के बावजूद रियल्टी कंपनी डीएलएफ ने गुरुग्राम में अपनी नई आवासीय परियोजना की शुरुआत के पहले दिन 376 तैयार फ्लैट बेचे। इनका मूल्य 700 करोड़ रुपये है। 

कंपनी ने अपनी आलीशान आवासीय परियोजना अल्टिमा का दूसरा चरण पेश किया। इस चरण में तीन और चार बेडरूम वाले तैयार फ्लैट शामिल हैं, जिनकी शुरुआती कीमत 1.6 करोड़ रुपये है। 

कंपनी ने कहा कि डीएलएफ ने पहले दिन 700 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के फ्लैट बेचे हैं। ग्राहकों को 376 फ्लैट आवंटित किए गए हैं, जो कुल 504 फ्लैट के 75 फीसदी से अधिक है। डीएलएफ ने अल्टिमा प्रोजेक्ट के पहले चरण में 400 फ्लैट की शुरुआत की थी। 
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बुलंदशहरः किराए के घर में असामाजिक हरकत करते युवक-युवती गिरफ्तार

नगर कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ले में सोमवार देर शाम जमकर हंगामा हुआ। बताया गया कि मोहल्ले में गत एक वर्ष से एक युवती और एक युवक रह रहे थे। मोहल्ले वासियों का आरोप है कि पिछले काफी समय से दोनों उक्त किराए के मकान में युवक युवतियों के साथ गलत काम करा रहे थे। 

सोमवार शाम मोहल्ले वासियों ने एक युवक व एक युवती को उक्त मकान में संदिग्ध हालत में दबोच लिया। साथ ही युवक की पिटाई कर दी। इस दौरान मोहल्ले में जमकर हंगामा हुआ। इसके बाद किसी ने 100 नंबर पर पुलिस को मामले की सूचना दी। 

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों को हिरासत में ले लिया है। नगर कोतवाल अरुणा राय ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है, जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वही, खबर लिखे जाने तक मामले में कोई तहरीर नहीं दी गई है।
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पुलिस हिरासत में युवक की मौत, कोतवाल समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित

हत्या के संदेह में गिरफ्तार युवक की पुलिस हिरासत में यातनाएं देने से मौत हो गई। मामले में एसपी डा. यशवीर सिंह ने पिलखुवा कोतवाली प्रभारी निरीक्षक योगेश बालियान, छिजारसी चौकी प्रभारी उप निरीक्षक अजब सिंह व आरक्षी मनीष कुमार को निलंबित कर दिया। युवक की मौत के बाद ग्रामीण भड़क उठे।

बवाल की आशंका को देखते हुए एहतियात के तौर पर सोमवार को दिन भर थाना पुलिस छावनी बना रहा। जानकारी के मुताबिक, पिलखुवा थाना क्षेत्र के गांव लाखन में 30 अगस्त को एक महिला का शव बरामद हुआ था। महिला की शिनाख्त थाना जारचा के ततारपुर निवासी के रूप में हुई। मृतका गांव लाखन निवासी प्रदीप तोमर (31) पुत्र राजकुमार तोमर के साले की पत्नी थी। इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

परिजनों ने बताया कि पुलिस ने रविवार शाम को प्रदीप के छोटे भाई कुलदीप को धोखे से फोन कर पिलखुवा बुलाया था, जहां से उसे हिरासत में लिया गया। उसके बाद छिजारसी चौकी पुलिस ने कुलदीप से फोन कराकर प्रदीप को भी चौकी बुलवा लिया। आरोप है कि पुलिस ने रात में प्रदीप को यातनाएं दी जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। पुलिस ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन गंभीर हालत में उसे मेरठ मेडिकल रेफर कर दिया। जहां रास्ते में ही प्रदीप ने दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही परिजन व ग्रामीण मेरठ मेडिकल पहुंच गए, जहां उन्होंने खूब हंगामा किया।
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हापुड़: सेना भर्ती के लिए आज शुरू होगी दौड़, पुलिस ने संभाली सुरक्षा की कमान

बाबूगढ़ में सेना भर्ती प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई। पूरे दिन पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी व्यवस्थाओं में जुटे रहे। पुलिसकर्मियों के साथ बैठक कर उन्हें सुरक्षा के मद्देनजर दिशा निर्देश दिए गए। मंगलवार को भर्ती के लिए दौड़ की शुरूआत होगी। पहले दिन गौतमबुद्धनगर के युवा भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।

व्यवस्थाओं को लेकर शिवा ढाबे पर बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें एसडीएम सत्यप्रकाश, सीओ राजेश कुमार ने पुलिसकर्मियों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। एसडीएम ने बताया कि भर्ती को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात करते हुए रास्तों पर जानकारी के लिए बोर्ड लगा दिए गए हैं।

भर्ती के लिए पहुंचने शुरू हो गए अभ्यर्थी

भर्ती प्रक्रिया के दौरान सुबह पांच बजे से दौड़ होगी। इसके लिए सोमवार दोपहर से ही युवाओं का पहुंचना शुरू हो गया। गौतमबुद्ध नगर के युवा भर्ती में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं। इस दौरान युवाओं में खासा जोश दिखाई दिया। 
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नरेला औद्योगिक इलाके में पटाखे बनाने की अवैध फैक्टरी पकड़ी, पुलिस ने 50 लाख का माल किया बरामद

एनजीटी और कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद नरेला औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्टरी व गोदाम का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने फैक्टरी के मालिक समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। फैक्टरी और गोदाम से पुलिस ने करीब 50 लाख रुपये के पटाखे और कच्चा माल बरामद किए हैं। साथ ही फैक्टरी से गोदाम तक पटाखा ले जाने में इस्तेमाल एक माल ढ़ोने वाला टैंपो जब्त किया है। 

आउटर नार्थ जिला पुलिस उपायुक्त गौरव शर्मा ने बताया कि फैक्टरी मालिक की पहचान पंजाबी बाग निवासी राजकुमार गोयल(58) और टैंपो चालक स्वतंत्र नगर नरेला निवासी दीपक के रूप में हुई है। फैक्टरी व गोदाम से पुलिस ने 14 टन पटाखे, 10 टन कच्चा माल, 10 मशीनें, पैकिंग सामग्री के अलावा अन्य सामान बरामद किए हैं। 

नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाना में तैनात सब इंस्पेक्टर तस्वीर, हवलदार प्रभात, बलराम व सिपाही सत्यवीर ने गश्त के दौरान एक टैंपो को रोका। तलाशी के दौरान उसमें 45 पेटी प्रतिबंधित पटाखे मिले। टैंपो चालक दीपक को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की तो बताया कि वह फैक्टरी से पटाखा लेकर गोदाम पहुंचाने जा रहा था। 

दीपक के निशानदेही पर पुलिस ने ई ब्लॉक स्थित फैक्टरी और एफ ब्लॉक भोरगढ़ स्थित गोदाम में छापा मारा, जहां भारी मात्रा में प्रतिबंधित पटाखे मिले। पूछताछ राजकुमार ने बताया कि दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध होने की वजह से वह इन पटाखों को हरियाणा के सोनीपत व आस पास के राज्यों में सप्लाई करने वाला था। पुलिस मालिक से पूछताछ कर इस धंधे में शामिल लोगों, कच्चा माल का सप्लायर और पटाखों के खरीदार की पहचान करने में जुटी है। 

मुनाफा कमाने के लिए तीन महीने पहले फैक्टरी खोली 
फैक्टरी मालिक ने बताया कि एनजीटी व कोर्ट के प्रतिबंध की वजह से उसने दीपावली पर मुनाफा कमाने के लिए तीन माह पहले पटाखा बनाने की फैक्टरी खोली। इससे पहले वह जूते चप्पल बनाने की फैक्टरी चला रहा था। इन पटाखों को दिल्ली में सप्लाई नहीं करना था। वह हरियाणा के सोनीपत व उसके आस पास के जिलों में सप्लाई कर मुनाफा कमाना चाहता था। 

पुलिस को देखते ही ड्राइवर को भागने का दिया था निर्देश 
टैंपो चालक दीपक ने पूछताछ में बताया कि मालिक ने उसे सख्त निर्देश दिया था कि पुलिस को देखते ही वह गाड़ी छोड़कर फरार हो जाए। लेकिन इससे पहले कि वह भाग पाता, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मालिक ने चालक को मुख्य रास्ते से गोदाम नहीं जाने की सलाह दी थी। 

पटाखा फैक्टरी में आग लगने से 17 की हुई थी मौत 
बवाना औद्योगिक क्षेत्र में वर्ष 2018 के जनवरी माह में अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्टरी में आग लगी थी,  जिसमें 17 लोगों की झुलसकर मौत हो गई थी। इस घटना के बाद काफी सख्ती बरतने की बात कही गई थी, लेकिन नरेला औद्योगिक इलाके में एक बार फिर अवैध रूप से चल रहे पटाखा फैक्टरी के सामने आने पर सारे दावों की पोल खुल गई है।
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